बाबा हरिनारायण जी ने भी बाबा नकोदर दास जी मूल सिद्धान्तों का अनुसरण करते हुए अपना जीवन भी मानवता की सेवा लगा दिया। जो भी व्यक्ति उनके पास आता उसे वह उचित सेवा व आशीर्वाद देकर समृद्धि कर देते और इस प्रकार हर व्यक्ति उनके प्रभाव से खाली हाथ नहीं जाता था।
अपनी गृहस्थी के साथ-साथ बाबा हरिनारायण श्रद्धा और आस्था से आने वाले लोगों की व्यवस्था का कार्यभार सम्भालते और उन की सन्तान भी कार्यभार में अपने हाथ बंटाती। उस झाड़ीमय जंगल में उन्होंने अपने उद्यम से आने वाले दीन दुःखियों के लिए रहने और यात्रियों के ठहरने का उचित प्रबंध किया।