श्री बाबा कलाधारी जी

श्री बाबा कलाधारी जी का जीवन एवं विरासत

बाबा कलाधारी जी कला निपुण प्रभावशाली व्यक्ति थे। जब गद्दी का कार्य भार अपने कन्धों पर आ गया तो तपोभूमि की देखरेख का कार्यभार अपनी पत्नी ठाकुरी देवी के कन्धों पर डाल कर धार्मिक प्रचार के लिए निकल गए। जैसा कि सुना गया है, गांव, गांव में पैदल चलकर होशियारपुर, जालन्धर से होते हुए अमृतसर लाहीर नगरों और गाँवों में दूर-दूर तक घूम कर धार्मिक प्रचार किया। अधिकतर लोगों के मन और वाणी पर कलाधारी का नाम अपना प्रभाव बना चुका था। बाबा कलाधारी जी ने गद्दी पर बैठे तो गद्दी पर बैठने के प्रथम वर्ष में ही वैशाख की संक्रान्ति को बैशाखी मेले का और माघ की संक्रान्ति को माघी मेले का आयोजन कर एक नई परम्परा को आरम्भ किया। समूचा पंजाब कलाधारी जी की कला से प्रभावित था।

बाबा कलाधारी जी की पत्नी ठाकुरी देवी जी जो आगे चलकर माता गौड़ के नाम से प्रख्यात हुई। वह पति के समय में भी गद्दी की देख रेख करती थी और उन्होंने सदावर्त लंगर की स्थापना स्वयं अपने हाथों से गद्दी पर की।