बाबा अभयराम जी ने अपने जीवन में मानवीय मूल्यों की स्थापना की और गद्दी के मूल सिद्धान्त धर्म की पवित्रता और मानवता की सेवा को पूर्णतः अपने जीवन में समाहित किया। इसी परम्परा का पालन बाबा हरीराम जी ने अपने जीवन काल में गद्दी की सेवा करने में समर्पित कर दिया।